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आं दोलन क र र हे किसानों ने बंगाल में जा कर कि या ब ड़ा ऐ लान, कहा अ गर बीजेपी चु नाव हा रेगी तो

12 मार्च को किसान नेता, जो कृषि कानूनों के खिलाफ आंदोलन कर रहे है, ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस की| जिसमें उन्होंने बीजेपी को वोट न देने की खुलकर अपील की|

वैसे जब पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव के होने का समय पास आने लगा, वैसे-वैसे किसान नेताओं ने बंगाल की ओर रुख करना शुरू किया|

मार्च महीने की शुरुवात में ही संयुक्त किसान मोर्चा (एसकेएम) के नेता राकेश टिकैत की तरफ से जानकारी आई, जो अक्सर सुर्ख़ियों में नज़र आ जाते है|

जो बैठक आज हुई, उसकी घोषणा मार्च के शुरुवात में ही कर दी गई थी कि, राकेश टिकैत बंगाल में होने वाली महापंचायत में शामिल होने वाले है।

12 मार्च को संयुक्त किसान मोर्चा के किसान नेता डॉ. दर्शन पाल, योगेंद्र यादव, बलबीर सिंह राजेवाल आदि इस महापंचायत में शामिल होंगे।

इसके अगले दिन ही यानि 13 मार्च को राकेश टिकैत बंगाल की किसान महापंचायत को संबोधित करेंगे।

इस दौरान संयुक्त किसान मोर्चा ने ऐलान किया था कि, जिन राज्यों में अभी चुनाव होने वाले हैं, उन राज्यों में यह किसान संगठन वहाँ की जनता से अनुरोध करेगा कि वो भाजपा जो किसान-विरोधी व गरीब-विरोधी नीतियां बनाती है- को दंडित करे।

तो आज किसान नेताओं ने प्रेस कॉन्फ्रेंस की और कहा कि, वह किसी पार्टी का समर्थन नहीं कर रहे हैं, लेकिन बंगाल चुनाव में अगर बीजेपी हार जाती है तो उसका घमंड टूट जाएगा और फिर किसानों की बात मानी जाएगी|

बता दें कि, ‘किसान एकता मोर्चा’ ने अपने एक ट्वीट में लिखा, ‘हमारे किसान नेताओं ने पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव के मद्देनजर ‘नो वोट टू बीजेपी’ के तहत अभियान शुरू कर दिया है|’

आगे लिखा, ‘हम लोगों से आग्रह करते हैं कि वे उस पार्टी के खिलाफ खड़े हों, जो किसान विरोधी कानून लाती है|’

इसके आलावा किसान संघों ने 26 मार्च को अपने आंदोलन के चार महीने पूरे होने के मौके पर भारत बंद का आह्वान किया है| दिल्ली के बॉर्डर पर 26 नवंबर से किसान आंदोलन चल रहा है|

साथ ही 28 मार्च को होलिका दहन के दौरान नए कृषि कानूनों की प्रतियां जलाने का भी निर्णय लिया है|