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बिहार में BJP के मुफ्त कोरोना वैक्सीन के वादे पर अब पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त का बयान आया सामने

बिहार विधानसभा के पहले चरण का चुनाव 28 अक्टूबर को होना है। इस चरण में 16 जिलों की 71 सीटों के लिए मतदान होगा। जिसके चलते सोमवार की शाम को प्रचार-प्रसार का दौर रुक जाएगा।

हर बार के जैसे इस बार भी नेताओं द्वारा बढ़-चढ़कर चुनावी वादे किए। इस बीच बीजेपी ने भी बिहार में कोरोना की वैक्सीन मुफ्त में बाटने का ऐलान किया।

जिसपर सवाल खड़ा हो गया है। इस संबंध में पेश हैं भारत के पूर्व मुख्य निर्वाचन आयुक्त वाई एस कुरैशी से भाषा के पांच सवाल और उनके जवाब। सवाल: चुनाव में कोरोना वायरस को लेकर निर्वाचन आयोग के दिशानिर्देशों का उल्लंघन हुआ! जवाब: दिशानिर्देशों का उल्लंघन तो हर चुनाव में होता है और उसके खिलाफ कार्रवाई भी होती है। निर्वाचन आयोग ने स्थिति से निपटने के लिए अपने दल तैनात किए हैं।

एक सवाल बीजेपी द्वारा बिहार में कोरोना की वैक्सीन मुफ्त बाटने पर हुआ कि, यह कितना उचित है? तो जवाब मिला: कोरोना का टीका मुफ्त देने को यदि घोषणापत्र में शामिल किया जाता है तो कानूनी तौर पर कोई उल्लंघन का मामला नहीं बनता, लेकिन नैतिकता का सवाल जरूर है। तो नैतिकता के लिहाज से सवाल उठना ठीक है पर कानूनी तौर पर कोई परेशानी नहीं है।

अगला सवाल राजनीति में अपराधीकरण के समाधान हेतु पूछा गया। तो जवाब रहा: यह बड़ी चिंता का विषय है। राजनीति में अपराधीकरण बढ़ते चले जा रहा है। इसमें दो बातें हैं, एक तो राजनीतिक दलों को चाहिए कि वह ऐसे लोगों को अपना उम्मीदवार ना बनाए। लेकिन जीत की संभावना को देखते हुए ऐसे लोगों को टिकट दे दिया जाता हैं। दूसरी बात कि, कानूनी तौर पर उन्हें हम रोकें।

निर्वाचन आयोग के साथ-साथ विधि आयोग की रिपोर्ट अनुसार गंभीर अपराध के मामलों में लंबित व्यक्ति को चुनाव लड़ने से वंचित किया जाना चाहिए। लेकिन देश के कानून अनुसार जब तक किसी के खिलाफ दोष सिद्ध नहीं हो जाता, आप कुछ नहीं कर सकते। एक सवाल घोषणापत्रों में लुभावने वादों को लेकर हुआ कि, इसपर कोई कानूनी नियंत्रण क्यों नहीं? जवाब: इसका इलाज तो मतदाता ही कर सकते हैं। साथ मीडिया को भी इसे याद दिलाते रहना चाहिए कि पिछले चुनाव में फलां पार्टी ने फलां वादा किया था।