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भारत को लेकर ट्रंप ने अब ऐसा क्या कहा कि लोग गुस्से में है?

अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की तरफ से एक ऐसी ख़बर आई है, जो भारतीय लोगों का मन खट्टा कर सकती है। यह शुक्रवार की घटना है। 

जब राष्‍ट्रपति पद के उम्‍मीदवारों में बहस चल रही थी। इस आखिरी प्रेसिडेंशल डिबेट में ट्रंप ने डेमोक्रेटिक चैलेंजर जो बाइडन को काउंटर करने के लिए एक असत्य बात बोल दी।

दरअसल, यह बात पर्यावरण और पेरिस जलवायु परिवर्तन समझौते पर चर्चा करते हुए ट्रंप ने कही थी। उनके कहे अनुसार, अमेरिका में सबसे कम कार्बन का उत्‍सर्जन होता है। उन्‍होंने कहा, ‘चीन को देखिए, वहां की हवा कितनी दूषित है। रूस को देखिए, भारत को देखिए, वहां की हवा कितनी गंदी है जबकि असल आंकड़े इसके विपरीत है। लेकिन डोनाल्ड ट्रंप ने अमेरिका की बड़ाई में कोई कसर नहीं छोड़ी। 

वो बोले, हमारे पास कार्बन उत्सर्जन की सबसे अच्छी संख्या है, जो हमने इस प्रशासन के तहत 35 सालों में प्राप्त किया है। हम उद्योग के साथ बहुत अच्छी तरह से काम कर रहे हैं। परंतु यूरोपियन यूनियन के आंकड़े ट्रंप के बयान से मेल नहीं खाते, क्योंकि इनकी रिपोर्ट के अनुसार चीन दुनिया में सबसे ज्‍यादा कॉर्बन डाई ऑक्‍साइड का उत्‍सर्जन करता है। ग्‍लोबल एमिशन में उसकी 30% हिस्‍सेदारी है। 

चीन के बाद अगला नंबर खुद अमेरिका का ही है। जिसकी कार्बन उत्‍सर्जन के 13.43% की भागीदारी है। जबकि भारत की हिस्सेदारी अमेरिका की भी आधी है। भारत का हिस्‍सा 6.83 प्रतिशत है। हालांकि भारत का यह हिस्‍सा रूस और जापान जैसे देशों से ज्‍यादा है। वैसे बता दें कि, ट्रंप के दिये इस बयान का खंडन सिर्फ यूरोपियन यूनियन के आंकड़े ही नहीं करते, बल्कि 2019 में आई एक रिपोर्ट ने भी किया। 

यह रिपोर्ट द एमिशंस डेटाबेस फॉर ग्‍लोबल एडमॉस्‍फेरिक रिसर्च की तरफ से पिछले साल आई थी। जिसमे कार्बन फुटप्रिंट के आधार पर देशों की लिस्‍ट जारी की थी। रिसर्च से पता चला था कि, कम आबादी होने के बावजूद भी अमेरिका सालों तक चीन और भारत से ज्‍यादा CO2 हवा में पैदा करता रहा। दुनिया की आबादी में USA का जितना हिस्‍सा है, वह उससे तीन गुना  ज्‍यादा प्रदूषण फैलाता है।