Home देश चीन पर कार्यवाही को लेकर बोला अमेरिका, पहला बयान आया सामने

चीन पर कार्यवाही को लेकर बोला अमेरिका, पहला बयान आया सामने

चीन सागर में चीन की आक्रामकता को देखते हुए अमेरिका ने इस संदर्भ में एक बड़ा बयान दिया है। वैसे देखा जाए तो, चीन आजकल हर तरफ से घिरता नज़र आ रहा है। 

चीन सागर में उसकी आक्रामकता की कहानी काफी पुरानी हो चुकी है, जिसपर हर किसिका ध्यान है, लेकिन वो अपनी हरकतों से बाज नहीं आता। 

ऐसे में अब अमेरिका के विदेश मंत्री माइक पोम्पिओ ने दक्षिणपूर्वी एशियाई देशों से कहा कि, वे विवादित दक्षिण चीन सागर में चीन की आक्रामकता के खिलाफ कार्रवाई करें। इस काम में अमेरिका उनको समर्थन देगा। गुरुवार को माइक पोम्पिओ ने दक्षिणपूर्वी एशियाई राष्ट्रों के संगठन के वार्षिक सम्मेलन में अपने समकक्षों से बात की थी। जिस दौरान उन्होंने ऐसा बयान दिया था। 

इस संगठन में फिलीपीन, वियतनाम, मलेशिया और ब्रुनेई शामिल है। जो चीन के साथ लंबे समय से इस व्यस्ततम जलमार्ग को लेकर क्षेत्रीय संघर्ष में उलझे हुए हैं। बता दें कि, चीन लगातार इसके समूचे हिस्से पर अपना दावा करता आया है। पोम्पिओ ने कहा कि, ‘मेरे विचार में आगे बढ़ते रहिए, बस बातें मत करिए कार्रवाई करिए। चीनी कम्युनिस्ट पार्टी को हमपर और हमारे लोगों पर भारी नहीं पड़ने दें। आपमें आत्मविश्वास होना चाहिए और अमेरिका आपकी दोस्त की तरह मदद करने के लिए यहां है। 

इससे पहले मई महीने में भी अमेरिका के रक्षा मंत्री मार्क एस्पर ने कहा था कि, चाइनीज कम्युनिस्ट पार्टीने आरोपों से ध्यान भटकाने और अपनी छवि सुधारने के लिए गलत सूचनाएं फैलाने का अपना अभियान तेज कर दिया है। इसके साथ ही हम दक्षिण चीन सागर में पीएलए (पीपल्स लिबरनेशन आर्मी) का आक्रामक व्यवहार लगातार देख रहे हैं

 उन्होंने आगे कहा था कि, फिलीपीन के नौसैन्य पोत को धमकाने, मछलियां पकड़ने वाली वियतनाम की नौका डुबाने और अन्य देशों को अपतटीय तेल एवं गैस संबंधी गतिविधियों को लेकर डराने-धमकाने के मामले इसी व्यवहार को दर्शाते हैं। अब पोम्पिओ ने उन चीनी कंपनियों को अमेरिका द्वारा काली सूची में डाले जाने का उल्लेख किया, जिन्होंने विवादित जलक्षेत्र में द्वीपों के निर्माण का काम किया है। अमेरिका ने नौवहन और विमानों से गश्त की स्वतंत्रता का हवाला देते हुए युदधपोतों एवं लड़ाकू विमानों की तैनाती की है।